मिश्रा जी,
सरपट दौड़े जा रहे हैं
पैर-हाथ एक दुसरे से
रेस लगा रहे हैआँखे सड़क पे गडाएबेतरतीब चले जा रहे हैसर पे जैसे कोई धून सवार है
सरपट दौड़े जा रहे हैं
पैर-हाथ एक दुसरे से
रेस लगा रहे हैआँखे सड़क पे गडाएबेतरतीब चले जा रहे हैसर पे जैसे कोई धून सवार है
बगल से अप्सरा गुजरतीया बदबू देती नाली-कालीइन्हें कोई सुध नहींबस कदम बढ़ा रहे हैसर पे जैसे कोई भूत सवार है
कल तक जो अपनी धोती कमीज पेछटास भर धुल नहीं पड़ने देते थेआज धुलिया गली मेंहोली मच रहे हैचेहरे पे रेखांये खिंची हैसर पे जैसे इनके मौत सवार है
नुक्कड़ पे पहुचे ही थेअचानक पीछे से किसी ने आवाज लगाईक्या बात हैराजधानी आज सड़क पे आई?
मिश्रा जी पीछे मुड़ेआँखे लाल, तनी भृकुटीचिल्ला कर बोलेमसखरी मत करोआज दिमाग नहीं ठीक हैदेर हो रही हैआज फारम भरने की अंतिम तारीख है.