Thursday, 1 May 2014

An open Love letter!


I love you.
मुझे नहीं पता,
तुम कौन हो ?
कहाँ रहती हो ?
तुम्हारी आवाज़ कैसी है ?
कोयल गोरैये या शेरनी जैसी है ?

पर हाँ इतना पता है कि
तुम्हारे प्यार मे बेवड़ा
होने के कगार पे हूँ,
यार! कविताये लिखने लगा हूँ,
वो चाँद सितारों नदियों बहारों वाले।
तू चाँद मैं सितारा,
तू दरिया मैं किनारा,
तेरे पास आने को तड़प रहा,
ये आशिक आवारा वैगेरह वैगेरह।।

लोग  कहते हैं न कि
भावनाओं  को शब्दों में
बयां नहीं किया जा सकता,
सही कहते हैं,
सागरों को चापाकलों
में नहीं समेटा जा सकता,
फिर भी,
लोटा बाल्टी भर
जितनी भी भावनाएं
उढ़ेल सकूँ शब्दों में,
बिद्या कसम उससे पाँच  गुना
ज्यादा कोशिश कर रहा हूँ।
बस एक बार तुम कोशिश
करो लोटे मे समंदर की
परछाई देखने कि,
तुम भी रूबरू हो जाओगी
मेरी इंतहा-ए-मोहब्बत से।।

गर फ़िर भी तुम्हे,
मेरे प्यार का
एहसास नहीं होता,
मेरे दर्द का
आभास नहीं होता,
तो कोई नहीं, बस
एक मरहम अदा कर देना,
अपनी किसी सहेली
का मोबाइल नंबर हि दे देना।

तुम्हारा और सिर्फ तुम्हारा
-आशिक आवारा

नोट : मिश्राजी कसम से ये आपकी बेटी के  लिये नहीं  लिखा।



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