तुम्हारे पास खाने को कुछ नहीं
भूखे हो?
रहने को घर नहीं
बेघर हो?
पढ़ा कभी नहीं
अनपढ़ अशिक्षित हो?
पता है तुम्हारी समस्या क्या है?
तुम आलसी हो,
बेवक़ूफ़ हो,
गधे हो,
समझते हो सरकार खाने को देगी
रहने को घर देगी, तुम्हे पढ़ाएगी?
अरे बेवकूफ़
अख़बार देखो, न्यूज़ देखो।
सरकार पे बड़ी बड़ी
मुसीबतें आन पढ़ी है,
हमारी अर्थव्यवस्था अभी
ख़राब दौर से गुजर रही है,
जीडीपी घट गया है,
नेट प्रॉफिट कम हो रही है,
ऊपर से ये महंगाई,
और तुम्हे सबकुछ
मुफ्त चाहिए?
फूटपाथ पे रहो, भूखे मरो
आलसी कहीं के।
हाँ तुम जो कोने में हो तुम भी सुनो
माना की तुम विकलांग हो
चल फिर नहीं सकते
पर इसमें हमारी क्या गलती है
यह तो तुम्हारी किस्मत है
जिन्दा रहो या मरो।
सरकार को जीडीपी बढ़ाने दो
नयी इंडस्ट्रीज लगाने दो
तुम्हे अभी कोई फायदा नहीं दिख रहा
पर भरोसा रखो
दसियों साल बाद जब तुम ये दिन
याद करोगे
तो कहोगे
की सरकार ने अच्छा किया
जो हमे खाने को नहीं दिया!
क्या हुआ हम भूखे मरे तो!
आज हमारा देश तो विकसित हो गया!!
भूखे हो?
रहने को घर नहीं
बेघर हो?
पढ़ा कभी नहीं
अनपढ़ अशिक्षित हो?
पता है तुम्हारी समस्या क्या है?
तुम आलसी हो,
बेवक़ूफ़ हो,
गधे हो,
समझते हो सरकार खाने को देगी
रहने को घर देगी, तुम्हे पढ़ाएगी?
अरे बेवकूफ़
अख़बार देखो, न्यूज़ देखो।
सरकार पे बड़ी बड़ी
मुसीबतें आन पढ़ी है,
हमारी अर्थव्यवस्था अभी
ख़राब दौर से गुजर रही है,
जीडीपी घट गया है,
नेट प्रॉफिट कम हो रही है,
ऊपर से ये महंगाई,
और तुम्हे सबकुछ
मुफ्त चाहिए?
फूटपाथ पे रहो, भूखे मरो
आलसी कहीं के।
हाँ तुम जो कोने में हो तुम भी सुनो
माना की तुम विकलांग हो
चल फिर नहीं सकते
पर इसमें हमारी क्या गलती है
यह तो तुम्हारी किस्मत है
जिन्दा रहो या मरो।
सरकार को जीडीपी बढ़ाने दो
नयी इंडस्ट्रीज लगाने दो
तुम्हे अभी कोई फायदा नहीं दिख रहा
पर भरोसा रखो
दसियों साल बाद जब तुम ये दिन
याद करोगे
तो कहोगे
की सरकार ने अच्छा किया
जो हमे खाने को नहीं दिया!
क्या हुआ हम भूखे मरे तो!
आज हमारा देश तो विकसित हो गया!!