Sunday, 14 April 2013

माफ़ीनामा

अरविन्द
बहुत धोखे खाये  हैं
हमने इन चंद वर्षो के
इतिहास में
इज्जत करता हूँ तुम्हारी
पर क्या करूँ भरोसा
नहीं होता अब किसी पे
होशो-हवास में।।

तुम्हे निराश नहीं
करना चाहता
पर अभी हमसे
कुछ भी अपेक्षा करना
बेईमानी होगी  
अभी  कुछ दूर तुम्हे
ना सिर्फ अकेले चलना है
इन पथरीली रास्तो पे
कँटीली झाड़ियो से होकर
बल्कि हमारे लिए एक
सहज सुगम
सड़क भी बनानी होगी
अगुआ नहीं बना सकते
तुम्हे बस अच्छाई के कयास में
भरोसा नहीं होता अब किसी पे
होशो-हवास में।।

तुम्हे इंतेजार करना होगा
नहीं जानता कितने दिन
अंगुलियों पे मैंने घंटे गिनना
छोड़ दिया
फ़क़त इतना कह सकता हु
तेरे साथ नहीं
तो तेरे खिलाफ भी नहीं
पर अभी तेरे साथ नहीं खड़ा
हो सकता तेरे आवास में
भरोसा नहीं होता है अब किसी पे
होशो-हवास  में।









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