Thursday, 13 June 2013

कोरी दया जब तक भीख में दी जाएगी 
इंसानियत अपाहिज ही नजर आएगी 

यहाँ सभी कहते हैं दिल साफ़ है मेरा 
पर नियत किसी से दिखाई नहीं जाएगी 

गलियाँ तो सभी साफ़ देखना चाहते हैं 
पर झाड़ू किसी से नहीं उठाई जाएगी 

सिनेमा में खूब सीटियाँ तालियाँ बजेगी
ऐसे कभी हीरो के लिए आवाज नहीं आएगी 

जब तलक हलक से स्वर क्रांति फूटता नहीं 
हुक्मरानों को जम्हूरियत बेगम ही नजर आएगी 


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