बड़ी तमन्ना है मेरी
की अजूबा बनूँ, कुछ अलग करूँ।
अचानक दिमाग में आया
क्यूँ न अलग इतिहास लिखूँ
सही को गलत, झूठ को सच
मनगढ़ंत कहानियाँ बेबाक लिखूँ
बीरबल को बेवकूफ
अकबर को अक्लमंद
तानसेन को बेसुरा
मान-सिंह को दरबान लिखूँ
तथ्यों को मरोड़ दूँ
कुछ इधर से उधार
कुछ उधर से उधार
ले बस कहानियाँ जोड़ दूँ
सच का मुखौटा पहना
झूठ को पुरजोर लिखूँ
बड़ी तमन्ना हुई मेरी
की मैं अलग इतिहास लिखूँ
पर फिर नजर मेज पे रखी
इतिहास की पुस्तको पे पड़ी
सच हैं कहा इनमे
सच का अल्पांश लिखा है
तंग हाथों से सबने
बस अपना अभिप्राय लिखा है
सच का चोला ओढ़ाकर
झूठ बेहिसाब लिखा है
अलग बनने की होड़ में
कहाँ बाज़ार में आ गया
आजकल फिर से बैठा सोच रहा हूँ
क्या करूँ क्या करूँ
की अजूबा बनूँ, कुछ अलग करूँ।
अचानक दिमाग में आया
क्यूँ न अलग इतिहास लिखूँ
सही को गलत, झूठ को सच
मनगढ़ंत कहानियाँ बेबाक लिखूँ
बीरबल को बेवकूफ
अकबर को अक्लमंद
तानसेन को बेसुरा
मान-सिंह को दरबान लिखूँ
तथ्यों को मरोड़ दूँ
कुछ इधर से उधार
कुछ उधर से उधार
ले बस कहानियाँ जोड़ दूँ
सच का मुखौटा पहना
झूठ को पुरजोर लिखूँ
बड़ी तमन्ना हुई मेरी
की मैं अलग इतिहास लिखूँ
पर फिर नजर मेज पे रखी
इतिहास की पुस्तको पे पड़ी
सच हैं कहा इनमे
सच का अल्पांश लिखा है
तंग हाथों से सबने
बस अपना अभिप्राय लिखा है
सच का चोला ओढ़ाकर
झूठ बेहिसाब लिखा है
अलग बनने की होड़ में
कहाँ बाज़ार में आ गया
आजकल फिर से बैठा सोच रहा हूँ
क्या करूँ क्या करूँ
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