Thursday, 28 March 2013

द्वंद


तू रुक
इन्तजार कर
पहले ये तो कर
फिर वो कर
और उसका भी वक़्त आएगा

अभी क्या है तेरे पास
बस दो चार चवन्नी
तू बस अभी दुनिया के पीछे चलता चल
तुझे सपने देखने की इजाजत नहीं

तुझे दौड़ने की जरूरत नहीं
तू अभी पैर पे खड़ा होना तो सीख
तूझे न्याय-अन्याय की बात करने की इजाजत नहीं
सो तू मत बोल की ये  नहीं ठीक
तो वो  नहीं ठीक

तू बस अभी खुद को देख
कुछ पैसे बना
नाम कमा
अपनी आवाज बुलंद कर
तू भूल दुनिया को, हालातो पे तेरा वश नहीं
तू बस अपनी गाड़ी में
पेट्रोल भरा
पहिये दौड़ा
अपनी जिंदगी बसर कर

कोई जरूरत नहीं है
बड़ा सोचने की
बड़ा बोलने की
तू कोई विधाता नहीं जो दुनिया बदलेगा
तू स्वार्थी बन
तू लालची बन
तू बस वो बन जो
तू अभी बन सकता है
खुद को दुसरो से अलग मत समझ
मत सोच की
तू कुछ भी बदल सकता है

तू बस अभी खुद में रीन जा
खुद की सोच खुद को बना

तू रुक
इंतजार कर
पहले ये तो कर
फिर वो कर
और उसका भी वक़्त आएगा।।





Tuesday, 19 March 2013

चंद्रशेखर आजाद

चंद्रशेखर आजाद
हम चाहे उन्हें भूल भी जाये
पर नेता उन्हें जरूर याद करते हैं
उनके मूल्यों को संजोये रखने
की फरियाद करते हैं

उन्होंने न पकड़े जाने की कसम खाई थी
इन्होने न पकडे जाने की रस्म बनाई  है
बस फर्क इतना है की
एक में थी आजादी की धुन
दुसरे है बर्बादी के घुन






Tuesday, 5 March 2013

दोस्तों की महफ़िल

बेसुध करने वाले
मयखाने तो मिलते है बहुत
पर सिर्फ समां बांध मदहोश
करने वाले साक़ी
कहाँ रोज मिलते है ?

तरस जाते है दो बूंद ख़ुशी को
पर क्खुसी से सराबोर झुमने के
मौके कहाँरोज मिलते है ?

नाचने गाने को समय
और जगह दोनों मिल ही जाते है
पर असमय बरबस ही
पैर थिरकने लग जाये
ऐसे लम्हे कहाँ रोज मिलते है?

दोस्तों से मुलाकात तो
हो जाती है अक्सर
पर दोस्तों की महफ़िल कहाँ  रोज सजते है 

Sunday, 3 March 2013

तुम

तुम एक अबूझ पहेली हो
खुद में खोई रहती
खुद की सहेली हो
तुम्हे जानना चाहता हूँ
समझना चाहता हूँ
पर जितनी कोशिश करू
उतना ही उलझता जाता हूँ

कभी छुईमुई
कभी ज्वार भाटा
कभी नदी की सुरमयी संगीत हो
कभी गुस्साती
कभी हंसाती
कभी प्रिय मनमीत हो

अब और नहीं करता कोशिश
तुम्हे जानने की
शायद
तुम अब मुझे
पहेली की तरह ही पसंद हो।।