बेसुध करने वाले
मयखाने तो मिलते है बहुत
पर सिर्फ समां बांध मदहोश
करने वाले साक़ी
कहाँ रोज मिलते है ?
तरस जाते है दो बूंद ख़ुशी को
पर क्खुसी से सराबोर झुमने के
मौके कहाँरोज मिलते है ?
नाचने गाने को समय
और जगह दोनों मिल ही जाते है
पर असमय बरबस ही
पैर थिरकने लग जाये
ऐसे लम्हे कहाँ रोज मिलते है?
दोस्तों से मुलाकात तो
हो जाती है अक्सर
पर दोस्तों की महफ़िल कहाँ रोज सजते है
मयखाने तो मिलते है बहुत
पर सिर्फ समां बांध मदहोश
करने वाले साक़ी
कहाँ रोज मिलते है ?
तरस जाते है दो बूंद ख़ुशी को
पर क्खुसी से सराबोर झुमने के
मौके कहाँरोज मिलते है ?
नाचने गाने को समय
और जगह दोनों मिल ही जाते है
पर असमय बरबस ही
पैर थिरकने लग जाये
ऐसे लम्हे कहाँ रोज मिलते है?
दोस्तों से मुलाकात तो
हो जाती है अक्सर
पर दोस्तों की महफ़िल कहाँ रोज सजते है
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