Wednesday, 12 June 2013

पहली मुलाक़ात


हम अजनबी ही
तो थे कुछ दिन पहले
यूँ ही मिले  थे टहलते
हुए रास्तो पे
तुम्हे याद है ना?

तुमने वो रंग-बिरंगी
इन्द्रधनुषी मुस्कराहट
पहनी थी
मैं पक्की सड़क चेहरे
पे पहन जा रहा था
तुमने टोका था
तुम्हे याद है ना?

मैं कैसे आँधियों में
खड़े पेड़ सा
अनिश्चित
अपने भाग्य पे
इतरा रहा था
तुम्हे याद है ना?

कुछ ही दिन तो हुए हैं
पर कितनी पुरानी
बात लगती है
बहुत आगे निकल चुके हम
पर आज जब  मुहाने पे खड़े हैं
तब मैं एक बार फिर तुमसे
पहली बार मिलना चाहता हूँ


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