देशभक्ति उबाल मारता है
बाघा बॉर्डर पे,
वहाँ हर रोज
14, 15 अगस्त का
माहौल होता है।
खून में गर्मी
गले में आवाज
आवाज में तल्खी
हौसले बुलंद
मुर्दे में भी जान फूंक दे
ऐसा कलोल होता है।
सारे देशभक्त मिलेंगे
आपको वहां
हर बच्चा बूढ़ा
युवा दिखता है यहाँ
देशभक्ति की पराकाष्ठा
की परिभाषा
हर रोज गढ़ी जाती है
बच्चा बच्चा जिंदाबाद
के जयघोष करता है
क्षण भर को सब कोई
खुद को भगत और बोस समझता है
सही कहते हैं वो लोग
घृणा से बड़ा कोई प्रेरक नहीं
बाघा गवाह है की हमे नफ़रत
की जरूरत है
हम प्यार के काबिल नहीं
अपने देश में लाख बुराई है
गरीबी है, भ्रष्टाचार है
नैतिकता नहीं देह व्यापार है
पर किसे फिक्र
हम तो बस खुश है इस बात से
की पडोसी की होती जगहंसाई है।
शर्म और हंसी आती है
ऐसे देशभक्तों पर
जो बस जयघोष कर
कर्तव्य निर्वाह करते हैं
कुछ खास फर्क नहीं ऐसे लोग
और राजनेताओ में
दोनों अपने स्वार्थ की खातिर
देशभक्ति का माखौल करते हैं।
सही कहते हैं वो लोग
घृणा से बड़ा कोई प्रेरक नहीं
बाघा गवाह है की हमे नफ़रत
की जरूरत है
हम प्यार के काबिल नहीं
अपने देश में लाख बुराई है
गरीबी है, भ्रष्टाचार है
नैतिकता नहीं देह व्यापार है
पर किसे फिक्र
हम तो बस खुश है इस बात से
की पडोसी की होती जगहंसाई है।
शर्म और हंसी आती है
ऐसे देशभक्तों पर
जो बस जयघोष कर
कर्तव्य निर्वाह करते हैं
कुछ खास फर्क नहीं ऐसे लोग
और राजनेताओ में
दोनों अपने स्वार्थ की खातिर
देशभक्ति का माखौल करते हैं।
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