Saturday, 6 July 2013

प्रासंगिक महाभारत

महाभारत की प्रासंगिकता
देखते बनती है
पिता अर्जुन की तरह
गर्भ में ही अभिमन्यु को
कोचिंग दिला रहे हैं

पुत्र तुम उठो, योद्धा बनो
जिंदगी आसान नहीं
चक्रव्यूह है
तोडना सिख रहे हैं

नजर जिधर भी घुमती है
उधर देखता हूँ
नन्हे कंधे, भारी तरकशो से लैश
गुरुकुल में जंग
की तयारी को जा रहे हैं 

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