भरी दुपहरी में
नंगे बदन
पसीने में तरबतर
दो जून की रोटी की
खातिर मजूरी करते
मजदुर से पूछो
की मौसम कैसा है
दावा करता हूँ
की वो हतप्रभ
एकटक देखते हुए
तुम्हे इतना ही कह पायेगा
की दो जून की रोटी
नसीब है आज
भूख की अट्टाहस
नही गूँजेगी आज
सो मौसम अच्छा है
नंगे बदन
पसीने में तरबतर
दो जून की रोटी की
खातिर मजूरी करते
मजदुर से पूछो
की मौसम कैसा है
दावा करता हूँ
की वो हतप्रभ
एकटक देखते हुए
तुम्हे इतना ही कह पायेगा
की दो जून की रोटी
नसीब है आज
भूख की अट्टाहस
नही गूँजेगी आज
सो मौसम अच्छा है
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